पाठ्यक्रम: जीएस-3/बुनियादी ढाँचा
सन्दर्भ
- हाल ही में नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) को हवाई अड्डों के निजीकरण की तीसरी प्रक्रिया के तहत भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के 11 हवाई अड्डों के निजीकरण के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिली है।
भारत में हवाई अड्डों का निजीकरण
- भारत में हवाई अड्डों का निजीकरण मुख्यतः सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) व्यवस्था के माध्यम से किया जाता है, जिसमें निजी रियायतधारी एक निर्धारित रियायत अवधि के लिए हवाई अड्डों का संचालन, प्रबंधन और विकास करते हैं।
- भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) विमानन बुनियादी ढाँचे, हवाई नौवहन सेवाओं और हवाई अड्डों के विकास जैसे प्रमुख कार्यों के लिए जिम्मेदार है।
- नए प्रस्ताव के तहत 11 हवाई अड्डों का 5 समूहों में 50 वर्षों के लिए निजीकरण किया जाना है। इसका उद्देश्य क्रॉस-सब्सिडीकरण को सक्षम करना है, जिसके तहत अधिक व्यावसायिक रूप से मजबूत हवाई अड्डों को छोटे या कम लाभदायक क्षेत्रीय हवाई अड्डों के साथ जोड़ा जाएगा।
इनमें शामिल हैं:
- अमृतसर और कांगड़ा
- वाराणसी, गया और कुशीनगर
- भुवनेश्वर और हुबली
- रायपुर और औरंगाबाद
- तिरुचिरापल्ली और तिरुपति
PPP मॉडल और PPP मूल्यांकन समिति (PPPAC)
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे या सेवाएँ प्रदान करने के लिए सरकार और किसी निजी संस्था के बीच दीर्घकालिक व्यवस्था है।
- निजी भागीदार वित्त, तकनीकी विशेषज्ञता, निर्माण, संचालन और रखरखाव में योगदान दे सकता है। साथ ही, जोखिम और जिम्मेदारियों का सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के बीच विभाजन किया जाता है।
PPP की प्रमुख विशेषताएँ
- दीर्घकालिक संविदात्मक संबंध
- सार्वजनिक और निजी भागीदारों के बीच जोखिम का बँटवारा
- प्रदर्शन आधारित सेवा वितरण
- निजी वित्त और कौशल का उपयोग
- बुनियादी ढाँचा परिसंपत्तियों का संपूर्ण जीवन-चक्र प्रबंधन
PPP मूल्यांकन समिति (PPPAC)
- यह एक अंतर-मंत्रालयी मूल्यांकन व्यवस्था है, जो PPP परियोजनाओं की मंजूरी से पहले उनका परीक्षण करती है।
- यह वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (DEA) के अंतर्गत कार्य करती है और प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र की PPP परियोजनाओं का मूल्यांकन करती है।
- इसका व्यापक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि PPP परियोजनाएँ वित्तीय रूप से व्यवहार्य, उचित रूप से संरचित, पारदर्शी और जनहित के अनुरूप हों।
हालिया निजीकरण घोषणाओं के कारण
- भारत में यात्रियों की बढ़ती संख्या और बढ़ती बुनियादी ढाँचा आवश्यकताओं के कारण बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता बढ़ी है।
- प्रस्तावित मॉडल के तहत रियायतधारी संचालन, प्रबंधन और विकास की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसमें स्वीकृत पूँजीगत व्यय तथा भविष्य में क्षमता विस्तार भी शामिल होगा।
- केवल विमानन क्षेत्र के अनुभव वाले निवेशकों के बजाय विभिन्न क्षेत्रों में प्रासंगिक बुनियादी ढाँचा अनुभव रखने वाले बोलीदाताओं को अनुमति देने से संभावित निवेशकों का दायरा बढ़ सकता है।
हवाई अड्डों के निजीकरण का महत्व
1. बेहतर दक्षता और सेवा गुणवत्ता
- निजी क्षेत्र की भागीदारी से प्रबंधन कौशल, तकनीक और ग्राहक-केंद्रित संचालन को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे यात्रियों के अनुभव में सुधार हो सकता है।
2. तेज बुनियादी ढाँचा विकास
- निजी वित्तपोषण सार्वजनिक संसाधनों का पूरक बन सकता है तथा टर्मिनल विस्तार, क्षमता वृद्धि और शहर की ओर स्थित बुनियादी ढाँचे के विकास में सहायता कर सकता है।
3. राजकोषीय एवं विकासात्मक लाभ
- PPP मॉडल सरकार पर तत्काल राजकोषीय बोझ को कम कर सकता है और सार्वजनिक संसाधनों को अन्य विकासात्मक प्राथमिकताओं के लिए उपयोग करने में सहायता कर सकता है।
4. क्षेत्रीय संपर्क
- लाभदायक और अपेक्षाकृत कमजोर हवाई अड्डों को एक साथ जोड़ने से क्षेत्रीय हवाई अड्डों के संचालन को समर्थन मिल सकता है तथा बेहतर क्षेत्रीय संपर्क के लक्ष्यों को बढ़ावा मिल सकता है।
चिंताएँ क्या हैं?
- बाजार में एकाग्रता सबसे प्रमुख चिंता है। कुछ ही कॉरपोरेट समूहों के हाथों में स्वामित्व का अत्यधिक केंद्रीकरण प्रतिस्पर्धा को कम कर सकता है और व्यवस्था-गत जोखिम पैदा कर सकता है।
- एक अन्य जोखिम अत्यधिक ऋण भार है। किसी एक परियोजना में वित्तीय कठिनाइयों का उसी कंपनी के स्वामित्व वाले कई अन्य हवाई अड्डों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- अन्य प्रमुख मुद्दे:
- रियायतों की लंबी अवधि और उचित नियामक निगरानी की आवश्यकता।
- जनहित और कम लागत वाली हवाई अड्डा सेवाओं की सुरक्षा।
- यह सुनिश्चित करना कि व्यावसायिक रूप से कमजोर हवाई अड्डे उपेक्षित न रह जाएँ।
- लाभप्रदता और क्षेत्रीय संपर्क के बीच संतुलन स्थापित करना।
आगे की राह
- हवाई अड्डों का निजीकरण प्रतिस्पर्धा-संवेदनशील और पारदर्शी PPP ढाँचे के तहत किया जाना चाहिए।
- स्वामित्व एकाग्रता की सीमा, मजबूत वित्तीय जाँच, प्रभावी नियामक निगरानी और नियमित प्रदर्शन मूल्यांकन आवश्यक हैं।
- सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निजी निवेश से क्षमता और सेवा की गुणवत्ता में सुधार हो, लेकिन इसके साथ एकाधिकार जैसी संरचनाएँ न बनें और क्षेत्रीय हवाई संपर्क प्रभावित न हो।
स्रोत: TH
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